क्षमा बडन को चाहिए छोटन को उत्पात ,
कहने वाले कह गए,बीत गयी वोह बात ॥
अब तो हालत यह हे ज्यों बड़ा त्यों घाघ,
अन्दर से गीदड़ भये , ऊपर चोला बाघ ॥
आम मनुष बोरा रहा पकड़ने को जिनके पग ,
ओछी उतनी उनकी सोच जितना ऊँचा पद ॥
बन बेठा कोई कलक्टर कोई गवरनर ,
कोई अफसर बस करते सब आराम ॥
गुरु हुआ अर्थहीन सभी मगन मोह मद काम
चाहे वोह धर्मानंद हो भिमानंद या आसाराम ॥.… ” निवेदिता ”
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