मेरा कृष्ण


चिर अंधेरों को चीरते हुए उस रोशनी के पीछे भागते चले जा रहे हैं , जो वाक़ई है ही नहीं , रेगिस्तान में प्यासे को मृगमरिचिका हो ज्यों । 

वैसे ही मात्र एक भ्रम ज़िंदगी का , कैसा खेल है यह .. एक खेल जहाँ कौन मंत्री कौन प्यादा नहीं मालूम .. कौन रानी कौन राजा नहीं मालूम और जो डोर हिला रहा है ऊपर बैठे बैठे क्या ख़ूब खेल दिखा रहा है .. 

एक काँटे में जाने कितनी मछलियाँ फाँस डाली , हर मछली के लिए अलग स्थान है दिल में उसके ,अलग कर्म और अलग धर्म , मानो अलग समय …

कोई नेत्रों में बसा अनजन ,कोई गले का हार , कोई आभूषण सा फबता हुआ बेसर तो कोई माथे पर लगा केसर । 

सभी के बीच कान्हा ऐसा सुशोभित है मानो काले शालिग्राम पर पीला चंदन , अंधेरे आकाश में चमकता चंद्र , भोर को चीरता सुरंगा लाल सूर्य। 

ऐसी मनोरम छँटा मंत्रमुग्ध किए देती है । पर वो छलिया किसी का नहीं , बस डोर हिलाता रहता है , जब जिसका खेल पूर्ण हुआ उसे ही उतार देता है , रह गया तो बस आँखों का अंजन। बाक़ी वेसर – बेसर नित नए ..


हर दिन अलग स्वाँग रचाए हुए हैं प्रभु , नित- नयी कहानी नित नए खेल , कभी -कभी वो एक अदृश्य डोर हमें ऐसे बँधती है जैसे ज़ंजीर से बांधा हाथी और वो आज़ाद अथाह ब्रह्मांड – आकाश में उड़ता परिंदा  । 

मैं प्रेम में डूबी सुबह इंतज़ार करने लगती हूँ शायद आज तो मेरे कान्हा का समय सिर्फ़ मेरा होगा , शायद आज वो पूर्णत: मेरे होंगे , सुबह नहला धुला कर तिलक -शृंगार होने के बाद इंतज़ार करने लगती हूँ ,जो भोग लग जाता है , शयन हो जाता है संध्या स्नान और अब फिर शयन .. मेरे छोर पर बस इंतज़ार .. 

फिर इंतज़ार अगले भोर का , अगले दिन का .. जाने कबतक यूँ बाँटते रहना होगा । 

कभी कभी सब मन का वहम सा लगने लगता है और मोह छूटता दिखाई देता है पर अगले क्षण मानो क्या डोर हिलाता  है वह ,सब मीठा सा लगने लगता है ,और मैं फिर मीरा बन रुक्मणी बनने के ख़्वाब संजोने लगती हूँ।


मैं तो ऐसी पापिन हूँ कि उनकी बाँसुरी से भी मुझे ईर्ष्या हो जाती है , मन ही मन कह बैठती हूँ झगड़ लेती हूँ “कान्हा बस अब ये और नहीं “.. अब ये आपके अधरों को छुए मुझसे न देखा जाएगा , अब मैं और बस मैं , अधरों से लेके धड़कनो तक ,अंग प्रत्यंग में मुझे बसालो आप, अपने चरणों में मुझे जगह देदो, परंतु अब मैं प्रेम में और नहीं रोऊँगी .. कहे देती हूँ ।  आप मुझे इतना प्रेम करो कि मेरे भावों के अश्रू ख़ुशी से छलकें और मेरे मन के मैल के साथ बुद्धि भी निर्मल हो जाए ।

मेरे ज्ञान चक्षु खोल दो , जिनसे मैं आपको प्रतिदिन निहार सकूँ, मेरे रोम रोम में आप हैं परंतु यह ईर्ष्या द्वेष फिर भी घेरे रहती है , आज ऐसी तान बजाओ की बस अब और न रहूँ इन सब मैं , और आपमें विलीन हो जाऊँ …🙏निवेदिता 


हे कान्हा आ जाओ सुन लो मेरी पुकार 

है विनती सविनय निवेदन बरामबार 

निवेदिता के प्रेम को कर लो स्वीकार 

 करो दूर मेरे मन से तम का विकार 

हो विकास मेरा,🙏 करो प्रेम का विस्तार .. ” निवेदिता “


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33 responses to “मेरा कृष्ण”

  1. rajivbakshi Avatar

    आपकी हिंदी आपकी अंग्रेज़ी से बहेतेरने है ! But you write well in English too ! Jyo ! Now waiting to see your next post in Assamese ( but with English translation ) ! भाल आसें !

    1. bhaatdal Avatar

      I too feel the same , I express well in Hindi as I always say Angrezi mein hath thoda तंग hai .. 🙂 Assamese post very soon .. I would love to atleast fulfill your this wish .. and ofcourse I will write the explanation along 🙂 thanks once again foe your visit , hope you liked my work 🙂

  2. bhaatdal Avatar

    Hehe you can still change it , I am sure that must be more wonderful than what it is now 🙂

  3. bhaatdal Avatar

    Nice nice .. but still say last one was epic 🙂

  4. Jyotirmoy Sarkar Avatar

    Written with deep feelings, seems you deeply believe His existence.
    Drawings are nice.

    1. bhaatdal Avatar

      Thank you bondhu , tumra lekha juno arma ke khoob bhalo lagchi , I am a regular reader of your posts now ..

      1. Jyotirmoy Sarkar Avatar

        Thanks a lot Ma’am, i am delighted.

        1. bhaatdal Avatar

          You are welcome , plz call me jyotsna or Nivedita whatever u feel like

  5. अजय बजरंगी Avatar

    शानदार प्रस्तुति —- राधे राधे

    1. bhaatdal Avatar

      राधे राधे , आपका स्वागत है । पधारने , पढ़ने व सराहने के लिए सविनय धन्यवाद 🙂

  6. bhaatdal Avatar

    Hehe .. let it be there must be many fans of you who would love the new look ..

  7. bhaatdal Avatar

    विवेकजी कुछ कहने के लिए शब्द नहीं है , आपकी सराहना व प्रोत्साहन पढ़कर में कुछ समय के लिए सन्न रह गई , क्या लिखूँ समझ नहीं आया । सादर आभार अपका मुझे इतना सम्मान देने के लिए । मैं कहाँ सूरदासजी जैसा अप्रतिम प्रेम कर सकती हूँ यह तो गुरुजन और मात पिता के संस्कार हैं जो कभी कभी ढोंगी मन में से छलक जाते हैं , वरना क्या कान्हा मिल न गया होता मुझे अब तक ।

  8. Shaded Views Avatar

    कहते हैं विरह को शब्दों में नहीं पिरो सकते, जब भी कोशिश होती कुछ छूट ही जाता हैं। आपने बहुत ही अच्छे से लिखा है लेकिन सब कुछ नहीं लिखा जा सकता शब्द वहां नहीं जाते। प्रेमाभक्ति में राग, ईर्ष्या,शिकायत, क्रोध सब है जो की ज्ञानमार्ग में नहीं होना चाहिए लेकिन प्रेम में ये सब आत्मसमर्पण के साथ है। ज्ञानमार्ग में पतन की सम्भावना है प्रेमाभक्ति में नहीं क्योकि इसमें अहंकार का स्थान नहीं, केवल समर्पण है।
    खूबसूरत रचना…:)

    1. bhaatdal Avatar

      बहुत बहुत धन्यवाद , ऐसे सुंदर शब्दों की बिलकुल भी अपेक्षा नहीं थी मुझे , नहीं मालूम था मेरी भावनाओं को इतना सम्मान होगा । सविनय धन्यवाद 🙂

      1. Shaded Views Avatar

        लिखा ही आपने इतना अच्छा है…:)

    1. bhaatdal Avatar

      सादर धन्यवाद

  9. bhaatdal Avatar

    हाहा टेढ़ी टाँग हम सब को अपने नीचे दबाने को है , कहीं हम में से कोई बर्बरीक बन ना पाँव को बींध दे । बहुत सुंदर भाव हैं आपके विवेक जी आते रहा करें पढ़ कर सत्संग सा भान देता है ।

  10. bhaatdal Avatar

    Thanks a tonne Abhay :):) Bhaat aur Dal means completeness , an important essence of living.. goes with food blog , love hate and even politics 🙂 thats why chosen Bhaat Daal 🙂 enjoy the delicious writing here 🙂 angrez bread butter rakh sakte hain toh hum Bhaat Dal ya roti sabzi kyun nahin ??

  11. bhaatdal Avatar

    Aah Then you can understand, now I know why you have such a beautiful heart .. Gopika is here but stay away this Krishna is mine ;);) .. Radhey Radhey 🙂

  12. bhaatdal Avatar

    Much Appreciated 🙂 He is everyone’s and he can take as many roop he want to .. chaliya hai 🙂 you from Mathura or somewhere else?

  13. bhaatdal Avatar

    Okay, just asked as I know a gal from Shillong with the same name staying @ Mathura 🙂 take care and have a blessed day .. 🙂

  14. bhaatdal Avatar

    Tu Meera na bane bas Rukmini ban jaye yehi meri prarthna hai shree krishna se

  15. doc2poet Avatar

    Beautifully written… Krishna is my favorite too. although I can’t be meera or radha but I believe he was the true अंतर्यामी , the clever, the cunning and the greatest of all; the almighty himself:-)

    1. bhaatdal Avatar

      Very true , thanks for reading and appreciating , it’s always a pleasure to hear from a wonderful writer like you . And yes Kanha is Chaliya ..

  16. bhaatdal Avatar

    बहुत बहुत धन्यवाद इतना सुंदर विचार आपका पा कर मन गद। गद हो गया

  17. Confused Thoughts Avatar

    Aur sunaiye mam
    Kese ho ap ?

  18. ajaykohli Avatar

    छलिया उसका नाम, छलना उसका काम
    कभी राम, कभी शाम
    जाने कहां बैठा कर रहा आराम
    मैं थक गया ढूंढ़ उसे सुबह शाम ।

    1. bhaatdal Avatar

      वाह बहुत सुंदर

  19. jhamanisha1997 Avatar

    Bahut badhiya likha hai aapne

    1. bhaatdal Avatar

      Apki sarahna ke liye dhanyawad

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