जीयो और जीने दो 

नन्ही मुस्कान को ज़रा पलने दो ,

मत तोड़ो उसे ,अभी खिलने दो ,

नयी कलियों को प्रस्फुटित होने दो ,

जो है सो है जैसा है उसे रहने दो
,

रज़ा उसकी मर्ज़ी में होने दो,


सुख दुःख के फेर शाश्वत है ,चलने दो ,

जो कहते हैं उन्हें कहने दो ,

सुनो सबकी, अपने मन की होने दो ,

बहते हुए भावों को ,अविरल बहने दो 

फल अच्छा या बुरा , मिलने दो 

ख़ुश रहो और ख़ुशी से रहने दो 

ज़्यादा नहीं तो बस “जियो और जीने दो “..  “निवेदिता “


P.S. : बेटियाँ  बाग़ में खिलती कलियों के समान हैं उन्हें प्रोत्साहित करो और आगे बढ़ने दो । बेटी को बचाओ और उन्हें पढ़ने दो ..  


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8 responses to “जीयो और जीने दो ”

  1. Pushpendra Dwivedi Avatar

    waah bahut khoob heart touching kavita

    lakh hoge zamaane me mahale do mahle yaaron , mere sar par khaprail ki chappar hai kya kisi jannat se kam hai #gul #shair

  2. Madhusudan Avatar

    bahut hi badhiya likha hai apne……saari jindagi to tutnaa hi hai…..abhi to mat todo….lajwab.

    1. bhaatdal Avatar
  3. surewrap Avatar

    Jiyo aur jeene do …bilkul sahi jagah pakde ho

  4. bhaatdal Avatar

    Shukriya 🙂 thanks for visiting the blog :):)

  5. रजनी की रचनायें Avatar

    बहुत ही खूबसूरत रचना है आपकी।

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