नन्ही मुस्कान को ज़रा पलने दो ,
मत तोड़ो उसे ,अभी खिलने दो ,
नयी कलियों को प्रस्फुटित होने दो ,
जो है सो है जैसा है उसे रहने दो ,
रज़ा उसकी मर्ज़ी में होने दो,
सुख दुःख के फेर शाश्वत है ,चलने दो ,
जो कहते हैं उन्हें कहने दो ,
सुनो सबकी, अपने मन की होने दो ,
बहते हुए भावों को ,अविरल बहने दो
फल अच्छा या बुरा , मिलने दो
ख़ुश रहो और ख़ुशी से रहने दो
ज़्यादा नहीं तो बस “जियो और जीने दो “.. “निवेदिता “
P.S. : बेटियाँ बाग़ में खिलती कलियों के समान हैं उन्हें प्रोत्साहित करो और आगे बढ़ने दो । बेटी को बचाओ और उन्हें पढ़ने दो ..

Leave a Reply