कुछ लोग पत्थर के बने होते हैं
न जीवन से समझते हैं न मृत्यु से
बर्फ से ठंडे दिल और गर्म सलाखों सा दिमाग
न प्रेम से पिघलते हैं न प्यार से समझते हैं
कुछ लोग पत्थर के बने होते है
कुछ बातें या तो उनकी समझ के परे होते हैं
या समझकर भी ढोंग नासमझी का करते हैं
कठोर हृदय के और खोखल सा दिमाग
न समझाए समझते हैं न कहे का करते हैं
कुछ लोग शायद पत्थर के बने होते हैं।
ज्योत्सना “निवेदिता”

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