राजनीति का खेल निराला
नेताओं का चक्कर झाला
अजब गजब है नियम पकड़े
खुद ही बनायें और बिगाड़े
सब में एक चौकीदार निराला
सबको भगवा में रंग डाला
बाइडेन कहे तू मेरा प्यारा
पुतिन कहे है दोस्त हमारा
पप्पू के तो कहने ही क्या
राजनीति को समझ न पाया
विपक्ष का खेमा ही डुबाया
किसी सवाल का जवाब न पाया
साइकिल पंचर, हाथी फुस्स
बुलडोजर का देखो काम
अवध पूरी में छाए राम
चलो काशी में भोले धाम
दिल्ली पंजाब में बिजली पानी
टैक्स चोरी और मुफ्त की चीनी
हेयवर्ड की है जय जय कार
चल रही आप की सरकार
कीचड़ में खिला कमल हर बार
झाड़ू चला है अबकी बार
पंजा मात खाता अपने ही दांव
डुबो गया छोटे दलों की नांव
ऐसा है राजनीति का दंगल
चुनावों में करदे जंगल में मंगल
वादों की झड़ी लगाते हैं भैया
बस वोटर ही उनके खिवय्या। ज्योत्स्ना “निवेदिता”
राजनीति के रंग
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