Category: हिंदी, कविता
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क्या तुम जाग रहे हो?
क्या तुम जाग रहे हो मेरे नयनों में स्वप्न बन जगते हुए जगमगा रहे हो मेरी अनकही बातों को क्या सुनपा रहे हो नहीं आती हूँ अब तुम्हें सताने पर क्या तुम मुझे सताए बिना रह पा रहे हो तुम्हें विधाता ने मेरे लिए चुनकर बुनकर भेजा है ठीक उस झमझमाती हुई बारिश की तरह…