Category: हिंदी, Hindi, kavita, poem, कविता

  • धरती और अम्बर

    मैं धरती वो अम्बरवो रहते हैं शीर्ष गगन परमेरी नज़रें भी जहां नहीं पहुँचेउनका मुक़ाम है इतना ऊपर बस छूने की चाहत लिए मन मेंमेघ सुस्ता रहे हैं उत्ताल शिखर मेंएक आलिंगन हो धरा अम्बर काहो मिलन हरितिमा और गगन का नभ सींचे धारा को प्रेम की बूंदों सेहो संगम अप्रतिम किरणों सेबुझे प्यास मरू…