Category: poetry
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जीवन गणित
जीवन का गणित बहुत आसान है एक और एक दो नहीं ग्यारह होते हैं गुणा भाग नहीं सिर्फ जोड़ बाकी होता है खुशियों को जोड़ते हैं दुख घटाए जाते हैं किस्मत गुणा होती है कर्म भाग किया जाता है जीवन का बस यही फलसफा होता है ज्योत्स्ना “निवेदिता”
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शरद पूर्णिमा
आई फिर पूस की रातछंटता आज तड़ित अंधकारउज्वल उदित पूर्ण चंद्रमांआज शरद रात्रि की पूर्णिमाकुमुद खिले हैं खिली चांदनीअमृत बनकर बरसी कौमुदीपीलो ये अमृत का प्यालाबनकर गोपिका संग गोपालाबांसुरी जब कृष्ण बजाएंअधरों पे जो तान सजाएंसज संवर कर आई राधिकानिधि वन में सब रास रचाएंज्योत्सना ” निवेदिता “
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Human Nature
Every human being is different in natureSome are creative, some enquisite and some Indifferent. The Indifferent ones are the cold ones,Untouched by any surge of emotion,Just like the solitary rock in the middle of the stream,Staying cold as ever inspite of the repeated and gentle strokes of the streams. The Indifferent ones are as cold…
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Long Distance Relationship
Only trust, honestyCare and loyality canKeep the relationship aliveIn a long distance relationship.The feeling of separationOvertakes the mind andCan’t be erased just byMeeting once or twice in a monthIt takes a lot of effortTo remain togetherAll what is missed isthe presence the cuddlesMaking love, hugskisses and the warmthOf togetherness everyday… Jyotsna”Nivedita” –
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धरती और अम्बर
मैं धरती वो अम्बरवो रहते हैं शीर्ष गगन परमेरी नज़रें भी जहां नहीं पहुँचेउनका मुक़ाम है इतना ऊपर बस छूने की चाहत लिए मन मेंमेघ सुस्ता रहे हैं उत्ताल शिखर मेंएक आलिंगन हो धरा अम्बर काहो मिलन हरितिमा और गगन का नभ सींचे धारा को प्रेम की बूंदों सेहो संगम अप्रतिम किरणों सेबुझे प्यास मरू…
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उषा
मेरी यह कविता नॉर्थ ईस्ट के पहाड़ी इलाकों में भोर के समय का वर्णन है। चूंकि वहां सूर्योदय जल्दी हो जाता है तो जन जीवन भी उतनी ही जल्दी शुरू हो जाता है किस प्रकार एक ओर प्रकृति अपने सौंदर्य से ओतप्रोत होती है तो दूजा देवालयों में हो रही आरती अर्चना की आवाज गूंज…
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क्या तुम जाग रहे हो?
क्या तुम जाग रहे हो मेरे नयनों में स्वप्न बन जगते हुए जगमगा रहे हो मेरी अनकही बातों को क्या सुनपा रहे हो नहीं आती हूँ अब तुम्हें सताने पर क्या तुम मुझे सताए बिना रह पा रहे हो तुम्हें विधाता ने मेरे लिए चुनकर बुनकर भेजा है ठीक उस झमझमाती हुई बारिश की तरह…