• विचार/ Thoughts

    कभी कभी हमारे बोलने के तरीके में एक खास तरह की तीक्ष्णता होती हैहम जो अपने आत्मसम्मान के लिए लड़ाइयाँ दिन में जीतते हैं उन्हें  रातों में सिर झुकाकर अन्धकार के हवाले कर देते हैं ।दबी खामोशियाँ, दीवारों पर उदासी, हवा में शुष्कता,खिड़की पर हताशा की आराम धूल साक्षी होती है उस संघर्ष की।कभी कभी…

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  • विचार

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  • अकेली

    कैसे हैं आप?यह भी जानती हूं मेरे ऐसा कहने और करने की कोई आवश्यक्ता भी नहीं और न ही आपको कोई फर्क पड़ेगा  फिर भी पूछना मेरी आदत बन गई है और मजबूरी भी। न जवाब का इंतजार न उम्मीद, बस पूछ लेना मेरी विवशता है क्यूंकि जानती हूं जैसे भी होंगे ठीक ही होंगे…

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  • Leheriya

    Beautiful leheriya Saree 😍. Leheria is symbolic for the showers of monsoon in Rajasthan and is worn specially in the monthof Savan as a symbol of prosperity, faith and honouring Devi Parvati. On Teej Sinjara it’s a tradition to gift Leheria from Inlaws to the newly weds. As a tradition and symbol of love, women…

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  • पत्थर दिल

    कुछ लोग पत्थर के बने होते हैंन जीवन से समझते हैं न मृत्यु सेबर्फ से ठंडे दिल और गर्म सलाखों सा दिमागन प्रेम से पिघलते हैं न प्यार से समझते हैंकुछ लोग पत्थर के बने होते है कुछ बातें या तो उनकी समझ के परे होते हैंया समझकर भी ढोंग नासमझी का करते हैंकठोर हृदय…

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  • Human Nature

    Every human being is different in natureSome are creative, some enquisite and some  Indifferent. The Indifferent ones are the cold ones,Untouched by any surge of emotion,Just like the solitary rock in the middle of the stream,Staying cold as ever inspite of the repeated and gentle strokes of the streams. The Indifferent ones are as cold…

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  • Long Distance Relationship

    Only trust, honestyCare and  loyality canKeep the relationship aliveIn a long distance relationship.The feeling of separationOvertakes the mind andCan’t be erased just byMeeting once or twice in a monthIt takes a lot of effortTo remain togetherAll what is missed isthe presence the cuddlesMaking love, hugskisses and the warmthOf togetherness everyday… Jyotsna”Nivedita” –

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  • तांत

    रेशम के धागों में बुने हुएकिसी तांत की साड़ी मेंसमय की परतों मेंसिमटी हुई “वो”साड़ी की  सिलवटों  मेंगुलाब की पंखुड़ियों की तरहबचपन से जवानी तकउसका एक कली से फूल बननायौवन की अल्हड़ अठखेलियांप्रेम में हंसना खिलखिलानाऔर फिर प्रौढावस्था  तकफूल के खिलने से बिखरने तककजरारी आंखों से ख्वाब झांकते रहेउसके आंचल में पलते रहेतब तक के…

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  • बादल

    ये बादल मुझे क्यूं लुभाते हैंबार बार अपनी ओर बुलाते हैंऔर मैं खिंचती चली जाती हूंचांद को छुपाकर सीने मेंमुझसे बहुत दूर ले जाते हैंकभी भागती हूं इनके पीछेकभी थककर बैठ जाती हूं जानती हूं के वो भी इन्हेंमेरी ही तरह दूर से ताकते होंगेइनमे बनती बिगड़ती आकृति मेंकभी मुझे कभी मेरे चेहरे को ढूंढते होंगेक्या…

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  • सारथी

    कृष्ण ने पूछा अर्जुन सेहे पार्थ! ये तूने क्या कियाचतुरंगी सेना को छोड़क्यों मेरा वरण कियामाखन तो दुर्योधन ले गया तूं मूढ़ खड़ा ही रह गया हे अर्जुन! तूने क्या किया.. अर्जुन मंद मंद मुस्कायेकहे! माखन का क्या मोलसखा! मैंने माखन चोर पा लियास्वामी,माया का मैं क्या करूँमुझे  मायापति ने अपना लिया भ्रात् को सेना…

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