त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधुश्च सखा त्वमेव
भारतीय सेना वह सूर्य है जिसका परचम विश्व में फहराता है मात्र दुश्मन ही नहीं मित्र देश भी हमारी सेना का लोहा मानते हैं और जैसे की सूर्य हमें अंधकार से बचाते हैं, है रोशनी देते हैं और एक मार्ग दर्शक की तरह हमें पथ दिखाते हैं वैसे ही भारतीय सेना भी स्मायनुसार हमारी माता, पिता, रक्षक, बंधु,होने का फर्ज निभाते आई है। सरहद पर खड़े हमारे भाई हमारी रक्षा के उस वचन का पालन करते हैं जो उन्होंने उस समय लिया था जब वर्दी का अनुग्रहण किया। आज हमारी थल, जल, वायु सेना के हर उस सैनिक का और उनके परिवार जनों का सादर आभार, धन्यवाद करती हूं जिन्होंने स्वयं को और अपने प्रियजनों को हमारी व देश की सेवा में न्योछावर किया है। हम उन सभी के जीवन पर्यंत ऋणी हैं जिनका ऋण से हम चाह कर भी इस जीवन में तो क्या सात जन्म में भी उऋण नहीं हो सकते।
ज्योत्स्ना “निवेदिता”
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