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धरती और अम्बर
मैं धरती वो अम्बरवो रहते हैं शीर्ष गगन परमेरी नज़रें भी जहां नहीं पहुँचेउनका मुक़ाम है इतना ऊपर बस छूने की चाहत लिए मन मेंमेघ सुस्ता रहे हैं उत्ताल शिखर मेंएक आलिंगन हो धरा अम्बर काहो मिलन हरितिमा और गगन का नभ सींचे धारा को प्रेम की बूंदों सेहो संगम अप्रतिम किरणों सेबुझे प्यास मरू…
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काव्य मंजुषा
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Evening
Rivers and drains have become silent,The birds are back to their nest,The Sun is playing hide and seek,Reflection of which can be seen in water Evening is supine,The red shade of memories have gone dark,The sound of blowing Conch from the temples could be heard,The flame of lamps have turned golden The hoofs of returning…
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उषा
मेरी यह कविता नॉर्थ ईस्ट के पहाड़ी इलाकों में भोर के समय का वर्णन है। चूंकि वहां सूर्योदय जल्दी हो जाता है तो जन जीवन भी उतनी ही जल्दी शुरू हो जाता है किस प्रकार एक ओर प्रकृति अपने सौंदर्य से ओतप्रोत होती है तो दूजा देवालयों में हो रही आरती अर्चना की आवाज गूंज…
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संध्या
नदिया नाले थम गए हैंनीड़ को पंछी लौट रहे हैखेल रहा है सूरज लुकछिपजल में छाया उसका प्रतिबिंब अलसायी सी है दुपहरीयादों की अरूणाई गहरीशंख नाद मंदिर में होतेज्योत जल रही है सुनहरी गौधुली में उड़ती गोरजबिखेर रही है आभा स्वर्णिमढलती सूर्य की किरणें अंतिमहो रही रात्रि को प्रेरित हूक उठती रह रहकर हृदय मेंमोर…
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मन मोहन
ज्योत्स्ना “निवेदिता” अंधकूप महा भयानछाया आत्म अभिमानघोर तिमिर पारावरकाल पर होकर सवारमचा रहा है हाहाकारहर और छाया है रुदनस्वान करते हैं क्रंदनसब के बीच एक कोमल“मन” सुंदर मेरा मोहनबैठ मधुर मधुर मुस्काएएक डोर प्रेम की हिलाएदूजा मधुर बांसुरी बजाएसबकी रक्षा करने वालाजाने कैसा खेल रचाए
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क्या तुम जाग रहे हो?
क्या तुम जाग रहे हो मेरे नयनों में स्वप्न बन जगते हुए जगमगा रहे हो मेरी अनकही बातों को क्या सुनपा रहे हो नहीं आती हूँ अब तुम्हें सताने पर क्या तुम मुझे सताए बिना रह पा रहे हो तुम्हें विधाता ने मेरे लिए चुनकर बुनकर भेजा है ठीक उस झमझमाती हुई बारिश की तरह…
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उधार की सांसें
स्वयं तो सांस लेने के काबिल भी नहींपर “मैं” में कमी कत्तई नहीं .. ले उधार की सांसे..कल को जीने निकल पड़ती हूं हर आज .. निन्यानबे के फेर में सांसे छूटती नहीं.. एक तेरे आने की आस है जो टूटती नहीं.. “ज्योत्सना” #निवेदिता
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बातें मटमैले चांद से
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Akshaya Tritiya
Akshaya Tritiya is a Sanskrit term in which Akshaya means no decay and Tritiya means third. This day is believed to bring good fortune to one’s life and most of the people begin their good work on Akshay Tritiya. People generally buy properties, jewellery and invest on this dayAkshaya Tritiya is an important day in Hindu…